PAMHO, Hare Krsna~ Thank you very much for your association. I hope to get to know you more in the future, as I love knowing all about and chatting with the Lord's devotees! Hope your Kartika month is going well.
राधा जी भगवान क्रिष्ण जी इन के जेसा प्रेम पुरे संसार में किसी का नही हे,
शादी शुदा भी भगवान क्रष्ण जी से उतना ही प्रेम करती थी जितना की बो अपने पति से ,
मेरे कहना का मतलब यही हे की ---
{ प्रेम किसी से करना पाप नही हे --- प्रेम में पाप करना पाप हे }
संसार में हर बस्तु अपना सम्मान चाहती हे और हम सम्मान तब ही दे सकते हे जब पुरे प्रेम से हम उस का आदर करेगे और किसी की भाबनाओ का आदर करना ही तो प्रेम हे
अपने भावनाए पूरी करना प्रेम नही बो माग हे और माग में अधिकार होता हे और अधिकार प्रेम नही हो सकता